Kanpur Fake Army Officer Arrest: यूपी के कानपुर में पुलिस ने मिलिट्री इंटेलीजेंस की महत्वपूर्ण सूचना पर एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को भारतीय सेना का नायब सूबेदार बताकर युवकों से नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी कर रहा था। पकड़ा गया आरोपी शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव गोरखपुर जिले के पिपरही गांव का रहने वाला है। पुलिस ने उसके पास से सेना की वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड, आर्मी कैंटीन कार्ड और कई अन्य जाली दस्तावेज बरामद किए हैं।
देता था स्पोर्ट्स कोटे से सेना में भर्ती कराने का लालच
एडीसीपी ईस्ट अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि मिलिट्री इंटेलीजेंस को गुप्त सूचना मिली थी कि कोई व्यक्ति सेना का अफसर बनकर स्पोर्ट्स कोटे के जरिए युवाओं को आर्मी में भर्ती कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूल रहा है। इस इनपुट पर मिलिट्री इंटेलीजेंस की टीम ने गहन जांच शुरू की। जांच में पता चला कि शिवम यादव नाम का कोई भी व्यक्ति भारतीय सेना में नायब सूबेदार या किसी अन्य पद पर कार्यरत नहीं है। इसकी पुष्टि होने के बाद मिलिट्री इंटेलीजेंस ने कानपुर पुलिस को सूचना साझा की। दोनों एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में शनिवार को चकेरी क्षेत्र के दिल्ली हाईवे स्थित नौबस्ता अंडरपास के पास आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी के गांव वाले भी उसको मानते थे फौजी
पूछताछ के दौरान, आरोपी शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव ने अपनी पहचान गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपरही गांव निवासी के रूप में बताई। चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी के परिवार, गांववाले और रिश्तेदार भी उसे सेना का असली अधिकारी मानते थे। वह वर्षों से इस फर्जीवाड़े को सफलतापूर्वक चला रहा था। उसके पास से बरामद फर्जी दस्तावेजों में आर्मी की पूरी वर्दी, नायब सूबेदार का आईडी कार्ड, विभिन्न मोहरें और कैंटीन कार्ड शामिल हैं।
रेसलिंग एसोसिएशन के फर्जी प्रमाण पत्र भी बनाए
चकेरी पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि शिवम यादव स्टेट लेवल का रेसलर है और नेशनल लेवल की रेसलिंग की तैयारी कर रहा था। उसका सपना सेना में भर्ती होकर अफसर बनने का था, लेकिन जब उसकी भर्ती नहीं हो सकी तो उसने गलत रास्ता अपनाया। वह खुद को आर्मी का नायब सूबेदार बताकर युवाओं को स्पोर्ट्स कोटे से आर्मी में नौकरी दिलाने का लालच देता था। पहले वह रेसलिंग एसोसिएशन से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये वसूल लिया करता था। इसके बाद नौकरी लगवाने के नाम पर 6 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की भारी भरकम रकम ठग लेता था।
AI की मदद से हथियारों के साथ बनाई खुद की तस्वीर
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कानपुर के चकेरी इलाके और गोरखपुर में अपना फर्जी ऑफिस भी चला रखा था। अब तक उसने सैकड़ों युवाओं को इस ठगी के जाल में फंसाया है। ठगी की रकम लाखों में बताई जा रही है। आरोपी के मोबाइल फोन से कई ऐसी तस्वीरें बरामद हुई हैं जिसमें वह सेना की वर्दी पहने, आधुनिक हथियार (कार्बाइन) लेकर और ऑफिस में बैठे नजर आ रहा है। पूछताछ में शिवम ने कबूल किया कि ये सभी तस्वीरें उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से बनाई थीं। वास्तव में उसके पास न तो कोई ऑफिस था और न ही असली हथियार।
प्रतिबंधित इलाकों तक बना ली थी पहुंच
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी अपने फर्जी आईडी कार्ड के सहारे कानपुर छावनी क्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक के घुस जाता था। इससे आम लोगों को पूरा यकीन हो जाता था कि वह वाकई सेना का अधिकारी है। फर्जी कार्ड के जरिए वह प्रतिबंधित मिलिट्री इलाकों और कैंटीन तक आसानी से पहुंच बना लेता था।
मिलिट्री इंटेलीजेंस और कानपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़े ठगी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। आरोपी को शनिवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में और गहराई से जांच कर रही है ताकि आरोपी के अन्य साथी और ठगी के शिकार युवाओं की पूरी लिस्ट तैयार की जा सके।
(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)
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